देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इस महत्वपूर्ण समिति की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है।
तकनीक और बड़े पैमानों के प्रबंधन में माहिर
नंदन नीलेकणि को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। 12-अंकों वाली बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ‘आधार’ के सफल क्रियान्वयन का श्रेय उन्हीं को जाता है। इसके अलावा, उन्होंने भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र (UPI) और अन्य सार्वजनिक तकनीकी ढांचों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
परीक्षा सुधार समिति का मुख्य उद्देश्य
हाल के दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठे थे। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है।
समिति के सामने मुख्य चुनौतियां
नीलेकणि के नेतृत्व वाली यह समिति परीक्षाओं के आयोजन में डेटा सुरक्षा, डिजिटल मूल्यांकन, और परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर सुझाव देगी। इसके साथ ही, एनटीए की कार्यप्रणाली के पुनर्गठन और लीक-प्रूफ मूल्यांकन ढांचा तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीलेकणि का विशाल तकनीकी अनुभव देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।







