शिमला। हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिमला में मुख्यमंत्री आवास की ओर एक विशाल विरोध मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने और विपक्षी नेताओं पर लगातार झूठे मुकदमे दर्ज कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रतिशोध की राजनीति
प्रदर्शन के दौरान मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर हिमाचल प्रदेश में प्रतिशोध की एक नई और अलोकतांत्रिक परंपरा की शुरुआत कर रहे हैं। नेताओं का आरोप था कि राज्य सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रखकर काम कर रही है और राजनीतिक विरोधियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी न तो फर्जी मुकदमों और मुकदमों की धमकियों से डरने वाली है और न ही किसी प्रकार के सरकारी दबाव के आगे झुकेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ उठाती रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी।
विकास कार्यों और जनहित पर ध्यान दे सरकार
भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार को विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय प्रदेश के विकास कार्यों, युवाओं के रोजगार और आम जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। प्रदेश में कई विकास परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है।
प्रदर्शन के अंत में भाजपा नेताओं ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से भी अपील की कि वे संविधान और कानून के दायरे में रहकर पूरी निष्पक्षता से अपना कार्य करें और किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर काम न करें। फिलहाल इस पूरे विरोध मार्च और भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों पर राज्य सरकार या सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







