चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) को अनिवार्य रूप से लागू करने की प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस फैसले पर तत्काल रोक लगाने और इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। राज्य सरकार का मानना है कि बिना पूर्ण तकनीकी तैयारी के इस नीति को लागू करने से आम जनता और वाहन मालिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
पुराने वाहनों और इंजन सुरक्षा पर उठे सवाल
विधानसभा सत्र के दौरान चर्चा करते हुए सरकार ने कहा कि पंजाब में वर्तमान में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो E20 ईंधन के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं हैं। यदि E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाया जाता है, तो इससे वाहनों के इंजन में खराबी आने और कलपुर्जे खराब होने का जोखिम बढ़ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों और वाहन चालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं और किसानों के हित की रक्षा
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उपभोक्ताओं के अधिकार, पुराने वाहनों की तकनीकी क्षमता और किसानों व आम नागरिकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को प्रमुखता से उठाया गया। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे दोपहिया और चार पहिया वाहन इस्तेमाल हो रहे हैं जो केवल सामान्य पेट्रोल या निम्न एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल हैं। ऐसे में बिना किसी विकल्प के E20 पेट्रोल अनिवार्य करने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय है।
तकनीकी अनुकूलता तक अनिवार्यता टालने की मांग
सदन में सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि जब तक देश में सभी श्रेणी के वाहनों की तकनीकी अनुकूलता (technical compatibility) पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक E20 पेट्रोल को अनिवार्य न बनाया जाए। पंजाब सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि वह जनहित और वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस फैसले की समीक्षा करे।







