माधोपुर बैराज गेट हादसा: लापरवाही पर तीन इंजीनियर निलंबित, निजी कंपनी को नोटिस
पंजाब सरकार ने माधोपुर बैराज के दो फ्लडगेट गिरने के मामले में कार्रवाई करते हुए गुरदासपुर नहर और ग्राउंड वाटर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता नितिन सूद, सब-डिविजनल ऑफिसर अरुण कुमार और जूनियर इंजीनियर सचिन ठाकुर को निलंबित कर दिया है। ये आदेश जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव कृष्ण कुमार ने 15 सितंबर को जारी किए। तीनों अधिकारियों का तबादला चंडीगढ़ स्थित मुख्य अभियंता मुख्यालय में कर दिया गया है।
यह हादसा 27 अगस्त को तब हुआ था, जब भारी बारिश और रावी नदी में पानी का अत्यधिक बहाव होने के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान 54 में से दो फ्लडगेट टूट गए। मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों को मैन्युअली गेट खोलने के दौरान फंसना पड़ा और एक चार्जमैन पानी के तेज बहाव में बह गया। बाकी अधिकारियों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला गया। इस घटना से कई गांवों में पानी भर गया, सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि डूब गई और विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासनिक सचिव ने मामले की जांच करवाई थी, जिसमें तीन इंजीनियरों को लापरवाही का दोषी पाया गया। सरकार पर बैराज की समय पर मरम्मत न करने और गेट की कार्यप्रणाली जांचने के लिए ड्रिल न कराने को लेकर विपक्ष हमलावर है।

जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने एक निजी कंपनी को भी नोटिस जारी किया है, जिसने 2024 में माधोपुर हेडवर्क्स गेट की क्षमता का गलत प्रमाणन किया था। नोटिस में कहा गया कि कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में गेट्स को 6.25 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेलने योग्य बताया था, जबकि वे आधी क्षमता पर ही फेल हो गए। मंत्री ने कहा कि गेट्स की विफलता से विभाग के कर्मचारी की मौत हुई और बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई।
हालांकि, कंपनी लेवल9 बिज प्राइवेट लिमिटेड ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैराज की संरचना की स्वास्थ्य जांच उसके कार्यक्षेत्र में शामिल ही नहीं थी। कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि उसे केवल मूल डिजाइन फ्लड के सापेक्ष डिजाइन फ्लड रिव्यू के लिए डेटा एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करनी थी।

























