लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर तीखी बहस जारी है, जिसमें सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
बिल में क्या है: प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश इस विधेयक में परीक्षा में धांधली पर सज़ा को कड़ा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोषियों के लिए जेल की सज़ा मौजूदा 3–5 साल से बढ़ाकर 5–10 साल, और जुर्माना 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक प्रस्तावित है। सर्विस प्रोवाइडर (परीक्षा कराने वाली एजेंसियों) के लिए जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये और रोक की अवधि 4 से बढ़ाकर 8 साल की गई है। बिल में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट, समयबद्ध जांच और तेज़ सुनवाई का भी प्रावधान है। सरकार ने इसे “आज़ाद भारत में अपनी तरह का पहला” और छात्रों के हित में “मील का पत्थर” कानून बताया है।
विपक्ष का हमला: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र छात्रों के हित की रक्षा करने में विफल रहा, और कहा कि हज़ारों युवा शांतिपूर्ण ढंग से जवाबदेही की मांग के लिए सड़कों पर उतरे थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि इस कानून की सफलता जेल भेजे गए लोगों की संख्या से नहीं, बल्कि रुकने वाले पेपर लीक से मापी जानी चाहिए।
सरकार का पलटवार: संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा करने के बजाय सिर्फ राजनीति की।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला NEET-यूजी पेपर लीक, जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन, और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ा है। सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी बनाई है।
(यह खबर संसद की कार्यवाही और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। बहस अभी जारी है।)







