सावन 2026: क्यों है यह महीना भगवान शिव को इतना प्रिय? जानें पूरी कथा, सोमवार व्रत के नियम और मान्यताएं

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सावन का पवित्र महीना कल 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रहा है, और हर तरफ “बम बम भोले” की गूंज सुनाई देने लगेगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है — आखिर बारह महीनों में से सिर्फ सावन ही भगवान शिव को इतना प्रिय क्यों है? आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा और वे सभी बातें जो हर शिव भक्त जानना चाहता है।

सावन शिव को क्यों प्रिय है? (पौराणिक कथा)

मान्यता है कि सावन का संबंध समुद्र मंथन से है। कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें से भयंकर विष “हलाहल” निकला, जो पूरी सृष्टि को नष्ट कर सकता था। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे “नीलकंठ” कहलाए। कहा जाता है कि विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया — और यही परंपरा आज जलाभिषेक के रूप में सावन में निभाई जाती है। यही वजह है कि इस महीने शिवलिंग पर जल चढ़ाना सबसे पुण्य का काम माना जाता है।

इस बार कितने सोमवार? (2026 की तारीखें)

सावन का हर सोमवार शिव पूजा के लिए खास होता है। उत्तर भारत में इस बार चार सावन सोमवार पड़ेंगे — 3, 10, 17 और 24 अगस्त 2026। महीना 28 अगस्त (रक्षाबंधन) को पूरा होगा।

सोमवार व्रत के नियम (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

  • व्रत कैसे रखें? सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं, और दिनभर फलाहार करें। शाम को शिव पूजा के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।
  • क्या चढ़ाएं? जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन और फल। मान्यता है श्रद्धा से चढ़ाया साधारण जल भी शिव को प्रिय है।
  • क्या न चढ़ाएं? परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल और हल्दी नहीं चढ़ाई जाती।
  • क्या न करें? इस महीने कई भक्त तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से परहेज करते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं।

कांवड़ यात्रा का महीना

सावन में लाखों “कांवड़िए” पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। हाईवे और मंदिरों में इस दौरान भक्ति का अनोखा माहौल रहता है।

महीने भर के त्योहार

सावन में नाग पंचमी, हरियाली तीज और अंत में रक्षाबंधन (28 अगस्त) जैसे बड़े त्योहार भी आते हैं, जिससे यह पूरा महीना आस्था और उत्साह से भरा रहता है।

इस सावन, चाहे आप मंदिर जाएं या घर पर ही सच्चे मन से जल चढ़ाएं — मान्यता है कि भगवान शिव भक्त की श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं।

(नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। तारीखें उत्तर भारत के पंचांग अनुसार हैं; क्षेत्र के अनुसार तिथियों में अंतर हो सकता है।)

Jantak khabar
Author: Jantak khabar

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