हमीरपुर। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद यदि हौंसले बुलंद हों, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की मेधावी छात्रा वैष्वी शर्मा ने। वैष्वी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 653 अंक हासिल किए हैं और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1239 प्राप्त कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।
मां के संघर्ष और त्याग ने दिखाई राह
वैष्वी शर्मा की यह सफलता आसान नहीं थी। लगभग 15 वर्ष पहले उनके पिता स्वर्गीय सज्जन कुमार का असमय निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी माता मोनिका गौतम के कंधों पर आ गई। एक निजी कॉलेज में कार्यरत मोनिका गौतम ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी बेटी की शिक्षा में कभी कोई बाधा नहीं आने दी। उन्होंने हर कदम पर वैष्वी का मार्गदर्शन किया और अपने त्याग व अटूट विश्वास के बल पर बेटी के सपनों को उड़ान दी।
JNV से दक्षणा फाउंडेशन तक का अनुशासित सफर
वैष्वी की प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), हमीरपुर से हुई। वह शुरुआत से ही एक होनहार छात्रा रही हैं और CBSE कक्षा 12वीं में हिमाचल प्रदेश के नवोदय विद्यालयों में टॉपर बनी थीं। इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन पुणे स्थित प्रतिष्ठित ‘दक्षणा फाउंडेशन’ की एक वर्षीय आवासीय छात्रवृत्ति के लिए हुआ।
दक्षणा फाउंडेशन में NEET की तैयारी के दौरान वैष्वी परिवार से दूर रहीं। कड़ी अनुशासन संहिता के कारण उन्हें महीने में केवल एक बार अपनी मां से बात करने का मौका मिलता था। बिना किसी आधुनिक भटकाव और मोबाइल तकनीक के, उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ परीक्षा की तैयारी की और अपनी मेहनत का परचम लहराया।
सफलता का श्रेय और प्रेरणादायक संदेश
अपनी इस शानदार उपलब्धि का श्रेय वैष्वी ने अपनी मां मोनिका गौतम, अपने गुरुजनों, JNV हमीरपुर और दक्षणा फाउंडेशन पुणे को दिया है। वैष्वी की यह कहानी उन सभी छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने देखने और उन्हें सच करने का जज्बा रखते हैं।
मुख्य बिंदु
- हमीरपुर की वैष्वी शर्मा ने NEET-UG 2026 में 653 अंक प्राप्त कर AIR 1239 हासिल की।
- बचपन में पिता का साया उठने के बाद मां मोनिका गौतम ने कठिन संघर्ष से बेटी को पढ़ाया।
- JNV हमीरपुर से 12वीं में प्रदेश टॉपर रहने के बाद दक्षणा फाउंडेशन पुणे के लिए चुनी गईं।
- एक साल के कड़े अनुशासन और मेहनत के बल पर डॉक्टरी के सपने को साकार किया।







