Kullu Dussehra 2025: भगवान नरसिंह ने ढालपुर में बांधा सुरक्षा सूत्र, जलेब में शामिल हुए गड़सा घाटी के देवी-देवता

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Kullu Dussehra 2025 भगवान नरसिंह ने ढालपुर में बांधा सुरक्षा सूत्र

कुल्लू : अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के चौथे दिन रविवार को भगवान नरसिंह की तीसरी जलेब यात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और आस्था के साथ निकाली गई। इस दौरान भगवान नरसिंह ने ढालपुर में सुरक्षा सूत्र बांधते हुए नगर की परिक्रमा की। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालु बने।

देवसंगम का दिव्य नजारा
सैंज और गड़सा घाटी से आए सोने-चांदी के आभूषणों से सुसज्जित देवी-देवता नरसिंह भगवान के साथ विराजमान हुए। ढालपुर मैदान देवध्वनियों, ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। देवताओं की इस जलेब यात्रा ने श्रद्धालुओं को अद्भुत भक्तिरस में डुबो दिया।

Kullu Dussehra 2025 भगवान नरसिंह ने ढालपुर में बांधा सुरक्षा सूत्र

इस तरह हुई जलेब यात्रा की शुरुआत
यात्रा की शुरुआत राजा की चानणी से हुई, जिसके बाद यह अस्पताल गेट, पुराने एसबीआई मैदान, और देवताओं के शिविरों के बीच से गुजरते हुए पुनः राजा की चानणी में संपन्न हुई।
जुलूस के सबसे आगे पुलिस जवान, उनके पीछे भगवान नरसिंह की घोड़ी, फिर देवी-देवताओं के बजंतरी दल, और अंत में भगवान नरसिंह की पालकी के दोनों ओर देवता चलते हैं।

सात देवी-देवताओं ने लिया भाग
तीसरी जलेब यात्रा में सैंज घाटी के सात देवी-देवता शामिल हुए —

  • भृगु ऋषि आशणी

  • जमलू ऋषि हवाई

  • जमलू ऋषि सीस

  • जमलू ऋषि उड़सू

  • गौतम ऋषि मनिहार

  • लक्ष्मीनारायण जेष्ठा

  • नजां के देवता च्यवन ऋषि

1660 ई. से निभाई जा रही परंपरा
कुल्लू दशहरा उत्सव का इतिहास 1660 ईस्वी से जुड़ा है। तब से लेकर आज तक यह परंपरा अटूट रूप से निभाई जा रही है। नरसिंह भगवान की जलेब यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कुल्लू की देव संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करती है।

साहित्यकारों ने बताया महत्व
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि नरसिंह भगवान दशहरा उत्सव में अठारह करडू सौह की परिक्रमा कर नगर की सुरक्षा का प्रतीक सूत्र बांधते हैं। जलेब यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से गहरा महत्व है, जो आज भी उसी श्रद्धा से निभाया जा रहा है जैसे सदियों पहले निभाया जाता था।

Vivek Singh
Author: Vivek Singh

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