इलेक्ट्रिक बसों से एचआरटीसी को करोड़ों का नुकसान, कलपुर्जे न मिलने से बन रहीं कबाड़

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एचआरटीसी को इलेक्ट्रिक बसों से करोड़ों का नुकसान

शिमला: हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसें अब विभाग के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। करोड़ों की लागत से खरीदी गई ये बसें लगातार खराब हो रही हैं और अब कबाड़ का ढेर बनती नजर आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, शिमला डिपो में करीब 20 इलेक्ट्रिक बसें लंबे समय से खड़ी हैं। इन बसों के कलपुर्जे विदेशों से मंगवाए जाते हैं, जिससे मरम्मत में महीनों लग जाते हैं। वहीं, डीजल बसों के कलपुर्जे आसानी से मिल जाने के कारण वे बेहतर स्थिति में हैं।

ड्राइवरों का कहना है कि चढ़ाई वाले इलाकों में ये इलेक्ट्रिक बसें सड़क पर ही रुक जाती हैं, जबकि हल्की तकनीकी खराबी आने पर भी ये चलना बंद कर देती हैं।

सरकार ‘ग्रीन हिमाचल, क्लीन हिमाचल’ के तहत नई इलेक्ट्रिक बसें लाने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन पुरानी बसों की हालत देखकर यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है।

एचआरटीसी अब निजी कंपनियों के साथ वार्षिक आधार पर मरम्मत अनुबंध (AMC) करने की योजना बना रहा है ताकि कलपुर्जों की उपलब्धता और मरम्मत दोनों की समस्या का समाधान हो सके।

वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई बसों में मेजर फॉल्ट हैं, जिन्हें ठीक करने में लाखों रुपए का खर्च आएगा। ऐसे में निगम फिलहाल उन्हें चलाने से ज्यादा स्क्रैप करने पर विचार कर रहा है।

Vivek Singh
Author: Vivek Singh

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