पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने झूठे आपराधिक केसों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के पुलिस अधिकारियों से कहा है कि वे झूठे एफआईआर रोकने के लिए एस.ओ.पी. (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जल्दी बनाएं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “जब किसी पर झूठा केस बनता है तो उसकी सामाजिक छवि और जिंदगी दोनों प्रभावित होती है। किसी आरोपी का नाम अक्सर मीडिया के द्वारा तुरंत उजागर कर दिया जाता है, जिससे व्यक्ति बिना दोष के भी अपराधी की तरह दिखता है।”
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि पुलिस कर्मचारियों को आरोप की जांच पूरी सावधानी और निष्पक्षता से करनी चाहिए। बिना सही सबूत के किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अधिकारियों को ऐसे मामलों में बहुत जिम्मेदारी से काम करना पड़ेगा ताकि मासूम लोगों की छवि खराब न हो और असली अपराधियों को ही सजा मिले।
हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि जितनी जल्दी हो सके, फर्जी पर्चों को रोकने के लिए एक मानक प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) बनाएं, ताकि भविष्य में बेगुनाह लोग झूठे मामलों में परेशान न हों।
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