राष्ट्रीय पहचान प्राप्त खाद्य वैज्ञानिक और पंजाबी लेखक डॉ. फकीर चंद शुक्ला को भावभीनी विदाई

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विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं ने फूलमालाएं और शॉल पहनाकर किया अलविदा

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लुधियाना, 11 अक्टूबर (JANTAK KHABAR): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर और प्रख्यात पंजाबी लेखक डॉ. फकीर चंद शुक्ला के निधन ने साहित्य और विज्ञान जगत को उदास कर दिया है। वह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के छात्र रहते हुए यंग राइटर्स एसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना के जीवन सदस्य होने के नाते वह पंजाबी भवन, लुधियाना की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। पिछले महीने ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। वैज्ञानिक साहित्य सृजन में भी उनका योगदान अद्वितीय था।

सहयोगियों और संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि

पंजाबी लोक विरासत अकादमी के अध्यक्ष और डॉ. शुक्ला के लगभग 21 साल तक पीएयू में सहकर्मी रहे प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने अंतिम संस्कार के बाद यह विचार व्यक्त किए। डॉ. शुक्ला के पुत्र अमितेश शुक्ला ने चिता को अग्नि दी। पंजाबी साहित्य अकादमी की ओर से महासचिव डॉ. गुलज़ार सिंह पंढेर के नेतृत्व में डॉ. गुरचरण कौर कोचर, के. साधू सिंह, अमरजीत शेरपुरी और एस. मलकीत सिंह औलख ने सामूहिक रूप से शॉल भेंट किया। पंजाबी लोक विरासत अकादमी की ओर से प्रो. गुरभजन सिंह गिल, डॉ. गुरइकबाल सिंह, प्रो. रविंदर सिंह भट्टल और डॉ. सरजीत सिंह गिल ने शॉल भेंट किया।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे डॉ. शुक्ला

डॉ. गुरचरण कौर कोचर ने बताया कि पिछले महीने ही उन्होंने अपना 81वां जन्मदिन मनाया था। डॉ. शुक्ला पंजाबी, अंग्रेजी और हिंदी में लिखने वाले विज्ञान लेखक थे और अपनी बाल साहित्य की रचनाओं के लिए भी प्रसिद्ध थे। वह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के सेवामुक्त प्रोफेसर होने के कारण उन्होंने भोजन और पोषण पर लघु कहानियों, नाटकों और बाल साहित्य की 30 पुस्तकें लिखीं। इसके अलावा अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी में भोजन और पोषण पर 400 से अधिक लेख लिखे।

साहित्यिक योगदान

डॉ. शुक्ला के करीबी स्नेही प्रभकिरण सिंह तूफान ने बताया कि उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं:

  • पंख कटी गौरैया (उपन्यास)

  • अलग-अलग संदर्भ (उपन्यास)

  • कैसे लगे मन (उपन्यास)

  • बंद खिड़कियों वाला मन (लघु कहानियाँ)

  • विस्पान (लघु कहानियाँ)

  • ज्योत से ज्योत जले (नाटक)

  • अंधेरी सुरंग (नाटक)

  • पेड़ों के बीज (नाटक)

  • नई सुबह (कहानियाँ)

उनके कई नाटकों को रेडियो और टीवी पर धारावाहिक रूप से प्रस्तुत किया गया।

शोक व्यक्त करने वालों में शामिल

डॉ. फकीर चंद शुक्ला के अंतिम संस्कार के अवसर पर त्रैलोचन लोची, मनजिंदर धनोआ, सहजप्रीत सिंह मांगट, डॉ. ज़ोरा सिंह बराड़, डॉ. हरदीप सिंह सुर, डॉ. वी.के. दिलावरी, डॉ. रमेश सदावर्ती, डॉ. नानक सिंह, हरिंदर सिंह भुल्लर, डिप्टी डायरेक्टर स्पोर्ट्स अनिल दत्त, डॉ. बलबीर सिंह सिद्धू, पूर्व निदेशक कृषि चरण सिंह (पीएयू), बलदेव सिंह (पंजाब एंड सिंध बैंक) सहित हजारों शुभचिंतकों ने डॉ. शुक्ला परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

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Author: Jantak khabar

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