शिमला — हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधिक अध्ययन संस्थान में आयोजित मॉडल यूनाइटेड नेशन्स और युवा संसद कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। यह आयोजन विकसित भारत 2047 के तहत भारतीय युवा एवं खेल मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि युवा देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान हैं। उन्होंने कहा कि आज की ‘जेन्ज़ी पीढ़ी’ आधुनिकता की प्रतीक होने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की संवाहक भी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा में यही युवा भगवान रघुनाथ जी का रथ खींचकर अपनी परंपरा को जीवित रखते हैं, यही देश की पहचान और ताकत है।
राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं की बौद्धिक क्षमता और नेतृत्व कौशल को निखारने का उत्कृष्ट माध्यम हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, विभिन्न विभागों के डीन, प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुलपति ने कहा कि इस तरह के आयोजन विश्वविद्यालय के छात्रों को विचारों की विविधता और संवाद कौशल का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनका समग्र विकास संभव है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में हुई छात्र संगठनों की हिंसक झड़पों पर चिंता जताई और कहा कि युवाओं को ‘वैचारिक लड़ाई’ लड़नी चाहिए, न कि हिंसा का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से कत्र्तव्यों और नियमों के पालन पर बल दिया और कहा कि लोकतंत्र में विचारों की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

























