कुल्लू: हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी के पारंपरिक आस्था केंद्र नग्गर में 18 साल बाद एक बार फिर ‘जगती’ (देव संसद) का भव्य आयोजन होने जा रहा है। शुक्रवार को होने वाले इस दिव्य धार्मिक अनुष्ठान में 300 से भी अधिक देवी-देवताओं के शामिल होने की संभावना है।
जगती पट्ट में गुरुवार को ही देवी-देवताओं के आगमन से दिव्य माहौल बन गया। घाटी के सभी देवता अपने कारकूनों (पुजारियों) और गुरुओं के साथ इस देव संसद का हिस्सा बनने के लिए नग्गर पहुंचे।
तैयारियां हुई पूरी
- आयोजन स्थल: नग्गर का जगती पट्ट
- माता त्रिपुरासुंदरी कमेटी के सदस्यों और गांववासियों के सहयोग से आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
- गुरुवार को जगती पट्ट के कारदार और भगवान रघुनाथ जी के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने मौके पर पहुंचकर आयोजन का जायजा लिया।
माता हिडिंबा के आदेश पर आयोजन जगती पट्ट के कारदार महेश्वर सिंह ने जानकारी दी कि इस ‘देव संसद’ का आयोजन कुल्लू दशहरे के दौरान माता हिडिंबा के आदेश पर किया जा रहा है।
शुक्रवार का कार्यक्रम:
- सुबह कुल्लू से अठारह करडूका धड़च नग्गर के जगती पट्ट पहुंचेगा।
- इसके बाद देव पूजा और देव कारबाई शुरू होगी।
- सभी देवी-देवताओं के आदेश पर ही आगे का अमल किया जाएगा।
सांसद कंगना रनौत ने टेका माथा नव-निर्वाचित सांसद कंगना रनौत भी अपने परिवार के सदस्यों और बहन के साथ नग्गर जगती पट्ट पहुंचीं। उन्होंने वहां उपस्थित देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया।
देवता कुई कंडा नाग जी पहली बार शामिल आनी के तांदी गांव के देवता कुई कंडा नाग जी भी इस बार पहली बार जगती (देव संसद) में शामिल होंगे। यह वही देवता हैं जो कुल्लू दशहरे में भी करीब 365 साल बाद आए थे। भगवान रघुनाथ जी के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह की ओर से निमंत्रण मिलने के बाद देवता ने जगती में शामिल होने की सहमति दी। देवता का निशान अपने गुरु के साथ गुरुवार सुबह ही आनी से जगती में शामिल होने के लिए रवाना हो गया।

























