नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चम्बा में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार पर आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार न तो आपदा से बचाव को लेकर गंभीर है और न ही राहत कार्य प्रभावी तरीके से क्रियान्वित कर रही है। आपदा किसी के कहने पर नहीं आती और न रुकती है, लेकिन इसके लिए पहले से उचित तैयारियां की जा सकती हैं। बावजूद इसके, पिछले तीन साल से आपदा का कहर जारी है, लेकिन प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं की।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मानसून और सर्दी के मौसम से पहले हर बार हाई लेवल मीटिंग होती थी, जिसमें मौसम विभाग के आंकड़ों और तैयारियों का मूल्यांकन किया जाता था। लेकिन इस बार ऐसी कोई बैठक नहीं हुई, जिससे सरकार की संवेदनहीनता उजागर होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आपदा आई, तो सरकार ने राहत कार्यों में तेजी लाने की बजाय पूर्व सरकार पर दोष मढ़ने का प्रयास किया।
विशेष रूप से उन्होंने मणिमहेश यात्रा का उदाहरण दिया। जयराम ठाकुर ने बताया कि जब उन्होंने सदन में 10,000 से अधिक फंसे हुए लोगों की सूचना दी थी, तब उपमुख्यमंत्री ने इसे गलत बताया। लेकिन बाद में सरकार ने खुद स्वीकार किया कि संख्या 15,000 से अधिक थी। इससे यह साबित हो गया कि सरकार के पास स्थिति की सही जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फंसे यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया और निजी कंपनियों ने मनमाने तरीके से लोगों से पैसे वसूले।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार लगातार आपदा पीड़ितों की मदद कर रही है। उन्होंने त्रिपुरा से आई राहत सामग्री और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों का जिक्र किया। साथ ही कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और केंद्र सरकार ने तुरंत 1500 करोड़ रुपए की सहायता भी दी। इसके बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करने के बजाय केंद्र पर मदद न करने का आरोप लगाना शर्मनाक है।

























