गरुड़ पुराण के अनुसार: क्यों वर्जित है महिलाओं का श्मशान घाट जाना, जानें पूरी वजह

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हिंदू धर्म के अनुसार, व्यक्ति के निधन के बाद उसका शव दहन कर अंतिम संस्कार किया जाता है, जिसे 16वें संस्कार के रूप में माना जाता है। इस प्रक्रिया के बाद बचे हुए अवशेषों को पवित्र नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। लेकिन हिंदू धर्म में महिलाओं का श्मशान घाट (Shamshan Ghat) जाना वर्जित बताया गया है। आइए जानें इसके पीछे की धार्मिक और सांस्कृतिक वजह।

सनातन धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें 16वां संस्कार अंतिम संस्कार के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म में व्यक्ति के निधन के बाद कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। मृत्यु के बाद शव को श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन हिंदू मान्यता के अनुसार महिलाओं का श्मशान घाट (Shamshan Ghat) जाना वर्जित माना गया है। क्या आप जानते हैं इसके पीछे का कारण क्या है? अगर नहीं, तो आइए विस्तार से समझते हैं।

🌼 इसका कारण क्या है?

  • मृत्यु के समय परिवार में गहरा शोक और पीड़ा का माहौल होता है। महिलाओं को अधिक संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यह माना जाता है कि वे श्मशान घाट की भयंकर व आत्मा-प्रेत से भरी ऊर्जा सहन नहीं कर पातीं।
  • गरुड़ पुराण (Garuda Purana) के अनुसार, श्मशान घाट को बुरी आत्माओं का स्थान माना गया है। शोक में डूबी महिलाएं अपने मन पर नियंत्रण खो बैठती हैं, जिससे उन्हें वहां जाने से रोका जाता है।
  • मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा कुछ समय के लिए घर में वास करती है। इसलिए घर को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, और महिलाएं इसी वजह से घर पर ही रहती हैं।
  • हिंदू परंपरा में मुंडन संस्कार (शरीर के बाल कटवाना) का आयोजन किया जाता है, लेकिन इसे महिलाओं और लड़कियों पर लागू करना अशुभ माना जाता है। यह भी एक प्रमुख कारण है कि महिलाएं श्मशान घाट नहीं जातीं।
  • गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि कोई महिला श्मशान घाट जाती है, तो उस पर बुरी शक्तियों का प्रभाव पड़ने का भी डर माना गया है।

 

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Author: Jantak khabar

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