मुंबई, 22 अगस्त 2025 (जनतक ख़बर) – भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि हर्बल दवाओं की गुणवत्ता और मानकों में उसकी भूमिका कितनी मज़बूत है। मुंबई में Ministry of Ayush और WHO-South East Asia Regional Office की ओर से आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला का आज समापन हुआ।
इस Regional Workshop on WHO Good Manufacturing Practices (GMP) for Herbal Medicines में भूटान, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड समेत कई देशों के 19 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए।
🔹 हर्बल क्वालिटी पर बड़ा फोकस
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि हर्बल दवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए WHO-GMP Guidelines, Good Herbal Processing Practices (GHPP) और Good Agricultural & Collection Practices (GACP) जैसे मानक बेहद ज़रूरी हैं।
डेलिगेट्स को मुंबई में Emami के WHO-GMP प्रमाणित प्लांट और Zandu Foundation Farms का दौरा भी कराया गया।

🔹 भारत की प्रतिबद्धता
CCRAS के महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने कहा कि –
“भारत पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक गुणवत्ता मानकों से जोड़कर हर्बल मेडिसिन को पूरी दुनिया में स्वीकार्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।”

वहीं WHO-SEARO के डॉ. पवन गोडटवार ने कहा कि –
“हर्बल दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भारत की भूमिका पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल है।”
🔹 निष्कर्ष
यह कार्यशाला दक्षिण-एशियाई देशों के बीच सहयोग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम साबित हुई।
📰 Source: PIB Delhi

























