हिमाचल प्रदेश में फार्मा क्षेत्र के लिए बड़ा कदम: ऊना बल्क ड्रग पार्क को मिली पर्यावरणीय मंजूरी

Picture of Jantak khabar

Jantak khabar

FOLLOW US:

हिमाचल प्रदेश, विशेषकर ऊना जिले के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। भारत सरकार के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रदेश में बनने जा रहे बल्क ड्रग पार्क को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट की घोषणा के समय से ही हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र में इसे एक बड़े बदलाव की ओर देखा जा रहा है, और अब मंजूरी मिलने के बाद यहां फार्मा उद्योग को नई उड़ान मिलने वाली है।

परियोजना का उद्देश्य और विशेषताएं

बढ़ते दवा उद्योग के लिए बल्क ड्रग पार्क एक ऐसी जगह होगी, जहां दवा निर्माण के लिए जरूरी मुख्य कच्चे माल और फार्मास्युटिकल एक्टिव इंग्रीडिएंट (एपीआई/केएसएम) देश में ही बनाए जा सकेंगे। अब तक भारत दवा उत्पादन के लिए कई जरूरी कच्चे माल विदेशों यानी चीन और अन्य देशों पर निर्भर था। इस पार्क के निर्माण बाद भारत फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकेगा। इससे दवा कंपनियों को कच्चा माल जल्दी, सस्ता और उच्च गुणवत्ता के साथ मिल सकेगा, जिससे दवाओं के रेट भी नियंत्रित होंगे।

ऊना बल्क ड्रग पार्क को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की उस योजना के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसमें मार्च 2020 में देशभर में तीन ऐसे पार्क प्रस्तावित किए गए थे। जुलाई, 2020 में केंद्रीय फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने इसके लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए। हिमाचल के उद्योग विभाग ने पार्क के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की, जिसका हाल ही में राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तरों पर मूल्यांकन हुआ। अक्तूबर 2022 में इस प्रोजेक्ट को अंतिम स्वीकृति दी गई थी, अब पर्यावरणीय मंजूरी मिलने से यह निर्माण-कार्य शुरू होने वाला है।

निवेश, रोजगार और आर्थिक भूमिका

इस पार्क की अनुमानित लागत लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें भारत सरकार से 996.45 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से 1,074.55 करोड़ रुपये का भाग है। इसके साथ ही इसमें 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की संभावना है। इस पूरे प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से प्रदेश में 15,000 से 20,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। इसका सीधा असर हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर होगा और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे।

यह परियोजना हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नाम के एसपीवी के तहत अमल में लाई जा रही है, जो राज्य के उद्योग विभाग के निर्देशन में काम कर रही है। जनवरी 2025 में इस पर ईएसी (एप्लिकेशन एंट्री कमेटी) की भी बैठक हो चुकी है, जिसके बाद साइट निरीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हुई। परियोजना से जुड़ी अनेक तकनीकी रिपोर्टें एनआईटी हमीरपुर ने तैयार की हैं—जैसे जल निकासी, भूकंपीय भेद्यता, भूस्खलन, पारिस्थितिकी पर असर, विकास योजना आदि।

राज्य सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पर्यावरणीय मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की और इसे हिमाचल की फार्मा इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। मुख्यमंत्री ने कहा, “ऊना में बन रहा बल्क ड्रग पार्क हिमाचल को दवा निर्माण का अग्रणी केंद्र बनाएगा और युवाओं के लिए नए रोजगार खोलेगा।” मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग की टीम, केंद्र सरकार, और फार्मा क्षेत्र के सभी सहयोगियों को बधाई दी।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि राज्य सरकार पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद तेजी से अगले चरणों की ओर बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “यह पार्क देश को फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। इससे स्थानीय उद्योग को प्रतिस्पर्धा मिलेगी और गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी।”

उद्योग विभाग के निदेशक आर.डी. नजीम ने कहा, “परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए टीम पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम भारत सरकार की दिशा-निर्देशों और पर्यावरण मंत्रालय के नियमों का पूरा पालन करते हुए इसकी स्थापना करेंगे।”

फार्मा सेक्टर की आवाज

फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स के अध्यक्ष बीआर सीकरी ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क की मंजूरी से प्रदेश का फार्मा इको-सिस्टम मजबूत होगा, गुणवत्ता आश्वासन बढ़ेगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बल मिलेगा। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, बीबीएन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, फार्मा टेस्टिंग लैब के सीईओ संजय शर्मा और हरोली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कौशल ने भी इस परियोजना को प्रदेश के लिए ‘नए युग की शुरुआत’ बताया।

परियोजना का सामाजिक और आर्थिक महत्व

ऊना बल्क ड्रग पार्क से सिर्फ फार्मा कंपनियों को या सरकार को नहीं, बल्कि पूरे राज्य में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का सस्ता और गुणवत्तापूर्ण लाभ मिलेगा। जो फार्मा उत्पाद पहले बाहर से आते थे, वे अब यहां स्थानीय स्तर पर बनेंगे। इससे दवाओं की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ेगा। साथ ही, प्रदेश को दवा उद्योग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

आगे की दिशा

पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद जमीन अधिग्रहण, निर्माण कार्य, मशीनरी इंस्टॉलेशन और भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार और संबंधित सभी विभाग मिलकर परियोजना को समय पर पूरा करने का प्रयास करेंगे ताकि हिमाचल के फार्मा उद्योग को जल्द ही नया आकार मिल सके।

Jantak khabar
Author: Jantak khabar

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

5
पंजाब में आई भयंकर बाढ़ का ज़िम्मेदार आप किसे मानते हैं?

और पढ़ें
हिमाचल प्रदेश
उत्तर प्रदेश
मनोरंजन