📍 कुल्लू ब्यूरो रिपोर्ट | हिमाचल प्रदेश समाचार
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध बिजली महादेव मंदिर में बन रहे रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में मंदिर कमेटी ने भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में केस दायर कर दिया है।
पहले एक स्थानीय व्यक्ति ने इस परियोजना के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसके बाद अब मंदिर कमेटी ने भी पेड़ों की कटाई और अनुमति प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
🧾 एनजीटी ने सरकार और कंपनी से मांगा जवाब
एनजीटी ने इस मामले में 13 नवंबर को सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें राज्य सरकार और निर्माण कंपनी को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर कमेटी के अनुसार, पिछली सुनवाई (17 अक्तूबर) में सरकार ने स्वयं माना था कि पेड़ कटान के लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं दी गई है।
🌲 बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई का आरोप
मंदिर कमेटी का कहना है कि रोपवे निर्माण के लिए कंपनी को 25 प्रकार की अनुमति लेनी होती है, लेकिन इनमें से कई पूरी नहीं की गई हैं।
जानकारी के अनुसार, लगभग 200 पेड़ों को काटने की योजना है, जिनमें से 80 से अधिक पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं।
🕉️ देव वाणी में भी विरोध के संकेत
स्थानीय देव समाज ने भी इस परियोजना का विरोध किया है। हाल ही में नग्गर में आयोजित जगती सभा में देवताओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली महादेव देवता इस समय “नाराज” हैं और क्षेत्र में हो रहे बदलावों को तुरंत रोका जाना चाहिए।
🗣️ पूर्व सांसद महेश्वर सिंह का बयान
पूर्व सांसद और भगवान रघुनाथजी के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि मंदिर कमेटी ने यह मुद्दा भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के समक्ष रखा है और जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा —
“हमने नड्डा जी को देव वाणी के आदेशों की जानकारी दी है और अब उम्मीद है कि प्रधानमंत्री स्वयं हस्तक्षेप कर इस प्रोजेक्ट को रोकेंगे।”
📑 मंदिर कमेटी का आरोप — फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष फतेह सिंह राणा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की मंजूरी तीन पंचायतों की वन अधिकार समितियों से दिखायी गई है, लेकिन संबंधित सदस्यों का कहना है कि उन्होंने कभी ऐसी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि “इस मामले में फर्जी दस्तावेज जमा करने के भी संकेत मिले हैं।”
🚠 प्रोजेक्ट का विवरण
यह रोपवे मोहल से बिजली महादेव मंदिर तक 2.33 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी कुल लागत 274 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें दो स्पैन होंगे और पर्यटक मात्र 10 मिनट में मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जबकि वर्तमान में यहां तक पहुंचने के लिए 15 किलोमीटर सड़क और डेढ़ किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।

























