पालमपुर : प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में किसान अक्तूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की किस्में एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360 और वीएल-829 इस समय के लिए उपयुक्त हैं। बुवाई के लिए बीज की मात्रा 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी जानी चाहिए। साथ ही बीज को बुवाई से पहले बैविस्टिन (2.5 ग्राम), वीटावैक्स (2.5 ग्राम) या रैक्सिल (1 ग्राम प्रति किग्रा बीज) से उपचारित करना जरूरी है।

चने की खेती
चने की खेती के लिए दोमट और रेतीली भूमि सबसे अच्छी मानी जाती है। बुवाई का सही समय मध्य अक्तूबर है। उन्नत किस्मों में हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2, जीपीएफ-2 और एचपीजी-17 शामिल हैं।
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छोटे व मध्यम दाने वाली किस्मों के लिए बीज की दर: 40–45 किग्रा/हेक्टेयर
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बड़े दाने वाली किस्मों के लिए बीज की दर: 80 किग्रा/हेक्टेयर
बीज को बैविस्टिन (1.5 ग्राम) और थीरम (1.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज) से उपचारित करना आवश्यक है।
बुवाई के लिए दूरी: -
जीपीएफ-2, हिमाचल चना-1 और हिमाचल चना-2 → 30 सेमी
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एचपीजी-17 → 50 सेमी
बीज की गहराई: 10–12.5 सेमी (कम गहराई पर विल्ट रोग का खतरा बढ़ जाता है)।
राया (तिलहनी फसल)
राया को निचले पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं के साथ मिश्रित खेती या शुद्ध रूप से उगाया जा सकता है। यह फसल बारानी और सिंचित दोनों परिस्थितियों में सफल रहती है।
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अनुमोदित किस्में: आरसीसी-4 और करण राई
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बीज की मात्रा: 6 किग्रा/हेक्टेयर
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कतार से कतार की दूरी: 30 सेमी
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बीज की गहराई: 2–3 सेमी
बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
सब्जियों की अगेती किस्में
प्रदेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में किसान सब्जियों की अगेती किस्मों की बुवाई कर सकते हैं।
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मटर : पालम त्रिलोकी, अरकल, वीएल-7 और मटर अगेता
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खाद की मात्रा (प्रति हेक्टेयर): 200 क्विंटल गोबर की खाद, 185 किग्रा इफको (12:32:16), 50 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 60 किग्रा यूरिया।
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लहसुन : जीएचसी-1 और सोलन सलेक्शन किस्में
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खाद की मात्रा (प्रति हेक्टेयर): 234 किग्रा इफको (12:32:16), 37.5 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 210 किग्रा यूरिया (अंतिम जुताई के समय)।
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👉 यह लेख किसानों को अक्तूबर माह में गेहूं, चना, राया और सब्जियों की बुवाई के सही समय, बीज की मात्रा, किस्मों और खाद के उपयोग की विस्तृत जानकारी देता है।

























