शिमला | जनतक ख़बर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में अब हरियाली का नया इतिहास लिखा जा रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राजीव गांधी वन संवर्धन योजना ने प्रदेश में वनीकरण को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है। इस योजना के तहत आम जनता, विशेषकर महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने “हरित हिमाचल” के सपने को साकार करने की दिशा में नई ऊर्जा भरी है।
🌱 महिला और युवक मंडलों की बड़ी भूमिका
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश के 255 महिला मंडलों ने 567.4 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया है, जबकि 63 युवक मंडलों ने 149 हेक्टेयर भूमि को हरा-भरा बनाया है।
यह सामुदायिक प्रयास न केवल वन क्षेत्र बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी योगदान दे रहा है।
कुल्लू जिला इसमें सबसे आगे रहा, जहां 46 महिला मंडलों ने 65 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे लगाए। वहीं, धर्मशाला क्षेत्र में 25 महिला मंडलों ने 48.5 हेक्टेयर में और नाहन के सात युवक मंडलों ने 14 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया।
🌍 साझेदारी से बदल रहा है पर्यावरण का चेहरा
राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत सामुदायिक भागीदारी और प्रोत्साहन-आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना बढ़ी है।
राज्य के बिलासपुर, चंबा, रामपुर, शिमला, हमीरपुर, धर्मशाला, मंडी, नाहन, कुल्लू और सोलन जिलों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया गया है।
🌳 मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया ‘हरित भविष्य की नींव’
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राजीव गांधी वन संवर्धन योजना केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक और सक्रिय बनाने का अभियान है।
उन्होंने कहा कि महिला और युवक मंडलों का समर्पण हिमाचल के हर कोने को हरियाली से भरने में अहम भूमिका निभा रहा है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भविष्य की नींव रख रहा है।

























