नई दिल्ली।
देश की राजधानी दिल्ली सोमवार शाम एक बार फिर धमाके से दहल गई। लाल किले के पास रेड लाइट पर खड़ी एक कार में अचानक भीषण विस्फोट हो गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए, कई दुकानों के शीशे टूट गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
धमाका शाम करीब 6 बजकर 52 मिनट पर हुआ। दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि विस्फोट लाल बत्ती पर खड़ी एक धीमी गति से चल रही कार में हुआ था।
उन्होंने कहा —
“विस्फोट के तुरंत बाद सभी जांच एजेंसियां, एफएसएल और एनआईए की टीमें मौके पर पहुंच गईं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।”
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, आसपास खड़ी 5–6 गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और लाल किला मेट्रो स्टेशन के शीशे चकनाचूर हो गए।
🚗 आई20 कार में हुआ धमाका, तीन लोग थे सवार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक धमाका आई20 कार में हुआ था, जिसमें उस वक्त तीन लोग सवार थे। विस्फोट कार के पीछे वाले हिस्से में हुआ।
जांच में पाया गया कि विस्फोट स्थल पर कोई गड्ढा नहीं बना, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई सतही या लो-इंटेंसिटी ब्लास्ट था।
फॉरेंसिक टीम ने कार के जले हुए पुर्जों से उसका रजिस्ट्रेशन नंबर निकाला। कार का नंबर एचआर-26… है, जो हरियाणा के गुरुग्राम में रजिस्टर्ड है।
बाद में पुलिस ने पुष्टि की कि यह वाहन हरियाणा निवासी नदीम के नाम पर रजिस्टर्ड है और विस्फोट एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
🧩 एनआईए और फोरेंसिक टीम की जांच जारी
एनआईए, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीमें धमाके के पीछे की वजहों की जांच में जुटी हैं।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह तकनीकी खराबी, गैस सिलेंडर ब्लास्ट, या आतंकी मंशा से किया गया धमाका था।
दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है, और शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
⚠️ 2011 के बाद फिर दहली दिल्ली – पुराने ब्लास्ट्स की याद ताजा
दिल्ली इससे पहले भी कई धमाकों का गवाह रह चुकी है।
🔸 25 मई 1996 – लाजपत नगर में विस्फोट, 16 मौतें
🔸 29 अक्तूबर 2005 – सारोजिनी नगर और पहाड़गंज ब्लास्ट, 60+ मौतें
🔸 13 सितंबर 2008 – दिल्ली के 5 इलाकों में धमाके, 30 मौतें
🔸 25 मई 2011 – दिल्ली हाई कोर्ट पार्किंग ब्लास्ट
अब 2025 का लाल किला ब्लास्ट राजधानी के लिए एक और काले दिन की याद बन गया है।
🩸 कीलें या तार नहीं मिले – IED की संभावना कम
जांच एजेंसियों ने शुरुआती रिपोर्ट में बताया कि घायलों के शरीर पर कीलें या तार के निशान नहीं मिले हैं, जो आमतौर पर IED धमाकों में पाए जाते हैं।
इससे माना जा रहा है कि यह विस्फोट कार के भीतर गैस या ज्वलनशील पदार्थ के कारण भी हो सकता है।
घायलों के शरीर पर जलने और धुएं के निशान पाए गए हैं, जो आग लगने से हुई चोटों की ओर इशारा करते हैं।

























