जब क्रिकेट मैचों की अनुमति है तो पाकिस्तान में तीर्थ यात्रा क्यों नहीं?” सिख संगठनों का सवाल

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ननकाना साहिब जाने से रोक पर सिख संगठनों का विरोध, जत्थेदारों की पासपोर्ट वापसी – सवाल उठे, जब क्रिकेट हो सकता है तो तीर्थ यात्रा क्यों नहीं

लुधियाना की 54 वर्षीय कंवलजीत कौर ढिल्लों, जो अपने पति के साथ नवंबर में गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने ननकाना साहिब जाने की तैयारी कर रही थीं, का उत्साह उस समय टूट गया जब उन्हें केंद्र सरकार की ओर से जारी उस परामर्श की जानकारी मिली जिसमें राज्यों को पाकिस्तान जाने वाले धार्मिक जत्थों की आवेदन प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए गए थे।

एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में रविवार (21 सितंबर 2025) को दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है, ऐसे में कंवलजीत कौर जैसी कई श्रद्धालु यह सवाल पूछ रही हैं कि जब क्रिकेट मैच हो सकते हैं, तो महीनों से तय तीर्थ यात्राओं पर रोक क्यों है।

गौरतलब है कि मई में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से करतारपुर साहिब कॉरिडोर बंद है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की कि 1974 के भारत-पाक समझौते के तहत नियमित रूप से जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के जत्थों को अब ननकाना साहिब नहीं भेजा जाएगा। मंत्रालय ने कहा, “पाकिस्तान के साथ मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए सिख श्रद्धालुओं के जत्थों को पाकिस्तान भेजना संभव नहीं है।”

कंवलजीत कौर ने कहा, “हमें बहुत झटका लगा। हमने पति-पत्नी मिलकर यह यात्रा तय की थी, लेकिन अब सब सपना टूट गया। कुछ साल पहले मैं अकेले करतारपुर साहिब गई थी और हमने तय किया था कि इस बार हम साथ जाएंगे। अगर क्रिकेट मैच हो सकते हैं तो हमें तीर्थ यात्रा से क्यों रोका जा रहा है?”

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने जुलाई में पासपोर्ट इकट्ठा करने और पाकिस्तान हाई कमीशन को आवेदन भेजने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन मंत्रालय के निर्देश के बाद SGPC को पासपोर्ट लौटाने पड़े। अमृतसर जिले के नंगली कुर्द गांव के 52 वर्षीय पलविंदर सिंह ने कहा, “दिल भारी है। ऐसा लगता है जैसे हम सिर्फ दूर से दूरबीन से ही करतारपुर साहिब देख पाएंगे।”

सिख संगठनों और राजनीतिक दलों ने केंद्र से न केवल ननकाना साहिब जाने पर रोक के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है, बल्कि करतारपुर कॉरिडोर को भी दोबारा खोलने की अपील की है। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के सिख स्टडीज़ चेयर के निदेशक अमरजीत सिंह ने सवाल उठाया, “हमने पाकिस्तान के साथ कई युद्ध देखे हैं, लेकिन यात्राएं जारी रहीं। दुनिया भर से श्रद्धालु ननकाना साहिब जाएंगे, तो सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ भारत के सिखों के लिए क्यों है?”

पूर्व प्रोफेसर धरम सिंह (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) ने कहा, “अगर सरकार को सुरक्षा की चिंता है तो पाकिस्तान के साथ सभी संबंध खत्म कर दे, केवल चुन-चुन कर रोक क्यों? क्रिकेट हो सकता है तो तीर्थ यात्राएं भी होनी चाहिए। यह पंजाब के साथ भेदभाव है।”

SGPC ने केंद्र से गुजारिश की है कि नवंबर में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर श्रद्धालुओं को ननकाना साहिब जाने की अनुमति दी जाए।

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Author: Vivek Singh

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