पूर्वोत्तर का शोक और राष्ट्रीय मीडिया की चुप्पी: ज़ुबीन गर्ग के निधन पर उमड़ा जनसैलाब

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Zubeen Garg

गुवाहाटी/असम न्यूज़: पूर्वोत्तर भारत इस समय गहरे शोक में डूबा हुआ है। असम के लोकप्रिय गायक और सांस्कृतिक प्रतीक ज़ुबीन गर्ग के निधन ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। गलियों, सड़कों और चौक-चौराहों पर उनके चाहने वालों की भीड़ उमड़ी हुई है। मातम की इस घड़ी में लोग उनके गाने गा-गाकर रो रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर आम लोग तक—हर कोई उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

पूर्वोत्तर का दर्द, नेशनल मीडिया की बेरुख़ी

जहां असम और पूर्वोत्तर के लोग ज़ुबीन गर्ग की विदाई पर ग़म में डूबे हुए हैं, वहीं तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया इस बड़े शोक से लगभग बेख़बर नज़र आ रहा है। मुख्यधारा मीडिया के चैनलों पर इस संवेदना की जगह क्रिकेट मैच की कवरेज हावी रही। लोगों का आरोप है कि यह पूर्वोत्तर और बाकी भारत के बीच मीडिया की गहरी खाई को उजागर करता है।

असम का सांस्कृतिक प्रतीक

ज़ुबीन गर्ग सिर्फ एक गायक ही नहीं, बल्कि असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की पहचान थे। उनके गानों और व्यक्तित्व ने उन्हें एक ऐसा कलाकार बना दिया, जिसने आम लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उनके चाहने वालों का कहना है कि “ज़ुबीन का काम और नाम मीडिया की चुप्पी से कहीं बड़ा है।”

पूरे प्रदेश में ग़म का माहौल

दो दिन से असम का माहौल ग़मगीन है। माताओं से लेकर युवाओं तक, हर कोई उनके गीत गुनगुनाते हुए आंसू बहा रहा है। ज़ुबीन गर्ग की लोकप्रियता और लोगों से उनका गहरा जुड़ाव इस बात का सबूत है कि वह सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक भावनात्मक शक्ति थे, जिसने पूरे प्रदेश को एक डोर में बांध रखा था।

Vivek Singh
Author: Vivek Singh

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