पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने बढ़ाया मदद का हाथ, 50 लाख की राहत सामग्री भेजी जाएगी
पंजाब में बाढ़ की भीषण तबाही ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है। खेत-खलिहान डूब गए हैं, मवेशियों की मौत हो चुकी है और 40 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। इस संकट की घड़ी में जमीयत उलमा-ए-हिंद उत्तराखण्ड ने 50 लाख रुपये की राहत सामग्री भेजने का ऐलान किया है।
हरिद्वार स्थित मदरसा दारुल उलूम आसादिया इक्कड़ में हुई कार्यकारिणी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष मौलाना शराफत अली कासमी ने बताया कि राहत सामग्री में आटा, चावल, दालें, पीने का पानी और दवाइयाँ शामिल होंगी। इसके लिए नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में टीमें बनाई गई हैं, जो अपने क्षेत्रों से सामग्री इकट्ठा कर पंजाब रवाना करेंगी।
मौलाना ने कहा कि “ऐसे वक्त में मदद पहुंचाना इंसानियत का फर्ज है। संगठन हर आपदा और संकट की घड़ी में देशवासियों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी रहेगा।”
पंजाब का दर्द, पूरे देश का दर्द है…
पंजाब की धरती इन दिनों बाढ़ की तबाही झेल रही है। घर उजड़ गए, खेत बह गए, हज़ारों परिवारों के पास न तो छत बची है और न ही रोज़मर्रा का सामान। आँखों में आँसू और दिलों में डर समाए, लोग बस एक उम्मीद लगाए बैठे हैं – कि कोई उनका हाथ थाम ले।
इसी मुश्किल वक्त में जमीयत उलमा-ए-हिंद उत्तराखण्ड इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आई है। संगठन ने 50 लाख रुपये की राहत सामग्री भेजने का ऐलान किया है। आटा, चावल, दालें, पानी और दवाइयाँ – यही इस समय बाढ़ पीड़ितों की सबसे बड़ी ज़रूरत हैं, और यही सामान जल्द पंजाब पहुँचेगा।
मौलाना शराफत अली कासमी ने सभी से अपील की –
“अगर हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा भी सहयोग करे, तो हम मिलकर हज़ारों ज़िंदगियाँ बचा सकते हैं। आज पंजाब हमारी ओर उम्मीद से देख रहा है, और हमें उस उम्मीद पर खरा उतरना है।”
यह सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि इंसानियत की डोर है, जो दिलों को जोड़ रही है।

























