छठी नवरात्रि: माँ कात्यायनी की पूजा विधि, महत्व और विशेष पूजन सामग्री | जनतक खबर

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छठी नवरात्रि: माँ कात्यायनी की पूजा विधि, महत्व और विशेष पूजन सामग्री

लेखिका: जनतक खबर धार्मिक डेस्क
प्रकाशन तिथि: 27-9- 2025


भूमिका

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इस दिन माँ की विधिवत पूजा करने से भक्तों को साहस, शक्ति और विजय की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं माँ कात्यायनी की पूजा विधि, महत्व और विशेष पूजन सामग्री के बारे में।


माँ कात्यायनी का स्वरूप और महत्व

माँ कात्यायनी दुर्गा जी का छठा स्वरूप हैं। इनका रंग सुनहरा है और यह सिंह पर सवार होती हैं। इनके चार हाथों में क्रमशः कमल, तलवार, त्रिशूल और वरमुद्रा है। मान्यता है कि इनकी उपासना से अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है और शत्रुओं पर विजय मिलती है।


छठी नवरात्रि पूजन विधि

सुबह का Ritual:

  1. स्नानादि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

  2. कलश स्थापना: मंदिर में कलश स्थापित करें।

  3. घट स्थापना: जौ बोएं और उन पर माँ की प्रतिमा स्थापित करें।

मुख्य पूजा:

  1. दीप प्रज्वलन: दीप जलाकर माँ को प्रणाम करें।

  2. ऋचा पाठ: “या देवी सर्वभूतेषु…” मंत्र का पाठ करें।

  3. फूल-अक्षत: माँ को लाल फूल और अक्षत अर्पित करें।

  4. नैवेद्य: माँ को मीठा भोग लगाएं (खीर या हलवा)।

संध्या आरती:

शाम को दीप जलाकर माँ की आरती उतारें और कथा सुनें।


विशेष पूजन सामग्री

  • रंग: लाल (माँ को लाल फूल, लाल वस्त्र विशेष प्रिय हैं)

  • फूल: गुलाब, लाल कमल, गेंदा

  • फल: केला, सेब, अनार

  • मिठाई: खीर, हलवा, लड्डू

  • अन्य: कुमकुम, चुनरी, शहद, इत्र


माँ कात्यायनी का मंत्र

ॐ कात्यायनै विद्महे कन्याकुमारि धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्
अर्थ: हम कात्यायनी देवी का ध्यान करते हैं, वह कन्या कुमारी हैं। वह हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें।


पंजाब-हिमाचल में छठी नवरात्रि के रीति-रिवाज

  • पंजाब: इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है।

  • हिमाचल: मंदिरों में विशेष श्रृंगार और भंडारे होते हैं।

  • चंडीगढ़: शक्ति पीठों में भक्ति संगीत और कीर्तन का आयोजन।


कथा: माँ कात्यायनी की उत्पत्ति

ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने कात्यायनी के रूप में अवतार लिया। इन्होंने महिषासुर का वध किया था, इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।


लाभ

माँ कात्यायनी की उपासना से:

  • शत्रुओं पर विजय

  • अखंड सुहाग की प्राप्ति

  • मानसिक शक्ति में वृद्धि

  • संकटों से मुक्ति


नोट:

यह पूजा विधि सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत रूप से पूजा करने से पहले किसी जानकार से सलाह लें।


📞 संपर्क: जनतक खबर धार्मिक डेस्क – editor.jantakkhabar@gmail.com

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Author: Jantak khabar

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